Why Kids don't Listen to Parents ?
बच्चे माता पिता की बात क्यों नहीं सुनते है ?

                           Why kids don’t listen to Parents?

                                                          

Does your child listen to you? Does he listen to you even if you speak only once? Most of us parents have this problem that our children do not listen to us or we have to speak again and again, so today I will tell you those 5 things because of which children do not listen to us….                                                                      

1.Unfulfilled Promises /False Promises :- The first reason for children not listening to us is “Unfulfilled Promises / false promises”. Yes, we often make many promises to children but are unable to fulfill them… Like son, I will play with you on holidays…. Or if you do this work, you will get this and so on. Do not make any such promise to the children which you cannot fulfill. Because if you repeatedly break your promise then why will the children listen to you…

 2.Unclear Rules :- The second point is “unclear rules” there are no clear rules in the house… father has different rules in the house….mother has different rules… and maybe grandparents are expecting something else…. So now whom should I obey… and then the child is not able to give priority to instructions in this confused state…. It also happens in the house that some rules are only for the children like not to look at the mobile for a long time… but the father can stay on the mobile for 2-3 hours… You only think then how he should listen and obey you… So parents, you make the rules, but whatever rules you make, they should be clear and should be for everyone...!!

 3.Trust Issues :- Next point is “Little Trust”….. Your children have little trust on you… Because you will change according to the situation, place, time and person… When he asks you something or wants to know something or someone If he wants certainty then our answer is not able to assure him…. Like shall we go to the movies on Sunday… Our answer is probably… that shows your confused and unbelieving mind.. I know you are not… Now it is a bit difficult to listen to confused and unbelieving… So be clear in your words and create trust in them.

 4.Quality Time :- The fourth point is “little bonding time / less quality time” Friends, please spend good time with your children… This will strengthen your relationship with them. Just imagine if your boss talks to you nicely… sometimes listens to your personal problems and understands you, then will your relationship not be good with him… and then we are ready to accept anything from such a boss… this is the rule here Same applies… So try to spend quality time with your kids..

 5. No Consequences:- My fifth and final point is “No Consequences”… Your child knows nothing will happen if he doesn’t listen to you… He knows we are not serious about what we are saying… As if our Karma is still there Clean it otherwise you will not get to watch TV today… and what would have happened… When he did not clean the room, we let him watch TV with a little warning… Friends, we do this every time… again and again… so that our children do not take our words seriously… do not ask them to say anything… do what you say, this will make the child understand that if I do not listen or ignore, I have to face the consequences….

 Friends, I hope these parenting tips of mine will help in building a good relationship between you and your child.

Abhishek Parihar

Psychologist & Counselor

 


 बच्चे माता पिता की बात क्यों नहीं सुनते है ?

क्या आपके बच्चे आपकी बात सुनते है ? क्या वो सिर्फ एक बार बोलने पर भी आपकी बात  मान  लेते है ? हममे से ज्यादातर माता पिता को ये समस्या  है की हमारे बच्चे बात नहीं सुनते है या हमको बार बार बोलना पड़ता है तो आज मैं आपको वह 5 बातें बताउंगा जिस वजह से बच्चे हमारी बात नहीं सुनते है….

बच्चो की हमारी बात नहीं सुनने का सबसे पहला कारण होता है “Unfulfilled Promises/ झूठे वादे”  जी हाँ हम अक्सर बच्चों से वादे तो बहुत करते है पर उनको पूरा नहीं कर पाते … जैसे कि बेटा मैं आपके साथ छुट्टी के दिन खेलूँगा …. या आप ये काम कर दो तो आपको यह मिल जायेगा वगेहरा.  बच्चो से ऐसा कोई वादा मत कीजिये जो आप पूरा न कर सको…. क्यूंकि अगर आप बार बार अपना वादा तोड़ते हो तो बच्चे आपकी बात क्यों सुनेंगे…

दूसरा पॉइंट है “अस्पष्ट नियम” घर में कोई कोई स्पष्ट नियम नहीं है … घर में पापा के अलग नियम है….मम्मी के अलग नियम है… और हो सकता है दादा दादी कुछ और उम्मीद कर रहे है …. तो अब में किसकी क्या बात मानू… और फिर बच्चा इस भ्रामक अवस्था में निर्देश को प्राथमिकता नहीं दे पाता है …. घर में ऐसा भी होता है कि कुछ नियम सिर्फ बच्चों के लिए ही होते है जैसे कि ज्यादा देर मोबाइल नहीं देखना … पर पापा 2-3 घंटे मोबाइल पर रह सकते है … आप ही सोचिये फिर वह आपकी बात कैसे सुनने और कैसे पालन करें … तो पेरेंट्स आप नियम बनिए पर जो भी नियम बनाये वह स्पष्ट होने चाहिए और सबके लिए होने चाहिए …!!

अगला पॉइंट है “Little Trust या अविश्वास”….. आपके बच्चो को आपके ऊपर थोड़ा कम विश्वास है … क्यूंकि आप स्थिति, जगह, समय और व्यक्ति के हिसाब से बदल जाओगे जब वो आपसे कुछ पूछता है या कुछ जानना चाहता है या कोई निश्चितता चाहता है तो हमारा जवाब उसको आश्वस्त नहीं कर पाता है …. जैसे कि क्या हम संडे को फिल्म देखने जायेंगे… हमारा जवाब होता है शायद … जो आपको उलझा हुआ और अविश्वासी मन का दर्शाता है .. मुझे मालूम है आप नहीं हो… अब उलझे हुए और अविश्वासी की बात सुनना थोड़ा मुश्किल होता है… तो अपने बातो में स्पस्ट रहे और उनमें विश्वास पैदा करे

चोथा पॉइंट है “little bonding time / कम अच्छा समय बिताना” दोस्तों कृपया अपने बच्चो के साथ अच्छा समय व्यतीत कीजिये इससे उनके साथ आपके सम्बंध मजबूत होंगे. ज़रा सोचिये अगर आपका बॉस आपसे अच्छे से बात करे… कभी कभी आपकी व्यक्तिगत समस्या भी सुनी और आपको समझे तोह क्या आपका सम्बन्ध उनके साथ अच्छा नहीं बनेगा… और फिर ऐसे बॉस की कोई भी बात हम मानने के लिए तैयार रहते है… यही नियम यंहा भी लागु होता है… तो अपने बच्चों के साथ क्वालिटी समय बिताने की कोशिश करे.. 

मेरा पांचवां और अंतिम पॉइंट है “No Consequences / कोई नतीजे नहीं”… आपके बच्चे को पता है अगर वह आपकी बात नहीं सुनेगा तो कुछ नहीं होगा… वह जानता है हम जो कह रहे है उसको लेकर गंभीर नहीं है … जैसे कि अपना कर्मा अभी साफ़ करो नहीं तो आपको आज टीवी देखने को नहीं मिलेगा… और होता क्या है… जब उसने कमरा साफ़ नहीं किया तो हम उसको थोड़ी चेतावनी देकर टीवी देखने देते है… दोस्तों हम हर बार… बार बार यही करते… जिससे हमारे बच्चे हमारी बातों को गंभीरता से नहीं लेते है… कोई भी बात कहने के लिए मत कहिये… जो कहिये वह कीजिये इससे बच्चे को समझ आएगा कि अगर मैंने बात नहीं मानी या सुन्नी तोह इसके नतीजे मुझे भुगतने होंगे….

दोस्तों मुझे उम्मीद है मेरे यह पेरेंटिंग टिप्स आपके और बच्चे के बीच ाचा सम्बन्ध बनाने में मदद करेंगे

 

                                            अभिषेक परिहार

बाल मनोवैज्ञानिक व सलाहकार

 

 

 

 

 

 


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(Are our kids a product ??)